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valmiki ramayana in hindi
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वाल्मीकि जी द्वारा रचित संस्कृत महाकाव्य जिसमें श्री राम की गाथा है – वाल्मीकि रामायण

जब भी भगवान श्री राम के चरित्र की बात आती है, तो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण (valmiki ramayana in hindi) को ही सबसे प्रमुख माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि त्रेतायुग में जन्मे थे तथा भगवान राम के समकालीन थे, यही कारण है कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को ही सबसे ज्यादा मान्य माना जाता है।

यदि रामायण का संधि विच्छेद किया जाए, तो वह होगा राम + आयणम्, जिसका अर्थ है “राम की जीवन यात्रा”। वाल्मीकि रामायण को विश्व का प्रथम काव्य माना जाता है तथा महर्षि वाल्मीकि को विश्व का आदि कवि कहा जाता है।

 

क्या है रामायण?

ऐसा कहा जाता है कि चारों वेद जिस परम तत्व का वर्णन करते हैं, वही रामायण में श्री राम के रूप में चित्रित किया गया है। श्री राम के रूप में अवतीर्ण होने पर साक्षात वेद ही महर्षि वाल्मीकि के मुख से श्री रामायण (valmiki ramayana in hindi) रूप में प्रकट हुए, इसलिए श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण की वेदतुल्य ही प्रतिष्ठा है।

रामायण सभी के लिए पूजनीय है तथा देश की सच्ची बहुमूल्य राष्ट्रीय पूंजी है, इस कारण भी रामायण सबके लिये संग्रह, पठन, मनन एवं श्रवण करने योग्य है। भगवान राम के चरित्र का उल्लेख कई ग्रंथों में होता है तथा सभी में कुछ न कुछ भिन्नता देखने को मिलती है। इस भिन्नता का कारण हम विष्णु पुराण से समझ सकते हैं, जिसके अनुसार एक कल्प में 14 मन्वन्तर होते हैं और एक मन्वन्तर या मनुकाल में 71 चतुर्युग होते हैं और 1 चतुर्युग में सत्य, त्रेता, द्वापर और कलि ये चार युग होते, अर्थात एक मन्वन्तर में श्री राम 71 बार इस पृथ्वी पर जन्म लेते है तो इसी कारण कई तथ्य, स्थान, प्रसंग आदि बदल जाते हैं।

 

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कैसे मिली महर्षि वाल्मीकि को रामायण रचने की प्रेरणा

valmiki ramayana in hindi - Maharshi Valmiki

एक बार वाल्मीकि जी ने देवर्षि नारद से पूछा कि “विश्व में ऐसा कौन है जो गुणवान, वीर्यवान, धर्मज्ञ पुरुष हैं जिन्हें पुरुषों में उत्तम माना जा सकता है?” इस प्रश्न के उत्तर में नारद जी ने भगवान श्री राम को गुणवान और आदर्श पुरुष बताया, तब महर्षि वाल्मीकि रामायण लिखने के लिए प्रेरित हुए।

 

वाल्मीकि रामायण में कितने कांड है (Valmiki Ramayana In Hindi)

वाल्मीकि रामायण में 24000 श्लोक तथा 6 काण्ड हैं, जो इस प्रकार हैं : बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किन्धा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड, जिसे युद्ध कांड भी कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उत्तर काण्ड मूल वाल्मीकि रामायण का भाग नहीं है, इसे बाद में जोड़ा गया है।

valmiki ramayan in hindi - वाल्मीकि रामायण

1) बाल कांड

बाल कांड वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) का पहला कांड है तथा इस कांड में दशरथ जी का पुत्र कामेष्ठि यज्ञ करवाना, श्री राम सहित चारों भाइयों के जन्म से लेकर राम विवाह तक की घटनाओं का वर्णन है।

2) अयोध्या कांड

वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) का दूसरा कांड है अयोध्या कांड। अयोध्या कांड में श्री राम वनगमन से लेकर चित्रकूट में भरत मिलाप तक की घटनाओं का वर्णन है।

3) अरण्य कांड

वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) का तीसरा कांड है अरण्य काण्ड। अरण्य कांड से ही भगवान राम के एक योद्धा के रूप में राक्षसों का वध करने की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है, क्योंकि इस कांड में शूर्पणखा के नाक विच्छेदन से लेकर सीता हरण तक की घटनाओं का उल्लेख मिलता है।

4) किष्किंधा कांड

वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) का चौथा कांड है किष्किंधा कांड। किष्किंधा कांड में ही भगवान श्री राम का हनुमान जी, सुग्रीव, जांबवंत आदि अन्य योद्धाओं से पहली बार परिचय होता है। इस कांड में हनुमान मिलन से लेकर माँ सीता की खोज की तैयारी तक के घटनाक्रम आते हैं।

 

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5) सुंदर कांड

सुंदर कांड वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) का पांचवा भाग है तथा इसमें हनुमान जी के लंका प्रस्थान से लेकर लंका दहन कर वापस आने तक की घटनाओं का वर्णन है, यही कारण है कि भगवान हनुमान की वीरता और भक्ति के रूप में अलग से भी इसका पाठ किया जाता है।

6) लंका कांड

वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) का छठा कांड है लंका कांड। लंका कांड में ही भगवान राम और रावण की सेना के मध्य युद्ध का वर्णन है, यही कारण है कि इसे युद्ध कांड भी कहा जाता है। इसमें समुद्र पर रामसेतु के निर्माण से लेकर राम रावण युद्ध और श्री राम के अयोध्या वापस आने तक की घटनाओं का वर्णन है।

7) उत्तर कांड

ऐसा कहा जाता है कि सातवां कांड अर्थात उत्तर कांड मूल रामायण (valmiki ramayana in hindi) का भाग नहीं था, अपितु इसे कुछ हजार वर्षों पहले ही जोड़ा गया है। परन्तु उत्तर काण्ड की अधिकांश कथाएं और प्रसंग हमें कई पुराणों में मिल जाते हैं। इस कांड में भगवान श्री राम के राज्याभिषेक के बाद की सभी घटनाओं का वर्णन मिलता है।

 

वाल्मीकि रामायण और श्री रामचरित मानस में अंतर

महर्षि वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण (valmiki ramayana in hindi) और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरित मानस के घटनाक्रमों में इतना अधिक अंतर है कि उन सभी को समाविष्ट करना तो संभव नहीं है, फिर भी आइये इन दोनों महान कृतियों के सम्बन्ध में कुछ मुख्य अंतरों को जानते हैं –

  1. सीता हरण के पूर्व हुए सुप्रसिद्ध लक्ष्मण रेखा प्रसंग का उल्लेख रामचरित मानस में है, वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) में ऐसा कोई वर्णन नहीं है।
  2. श्री राम और माता सीता के विवाह का भी दोनों ग्रंथों में अलग अलग वर्णन मिलता है। विवाह से पूर्व वाटिका में श्री राम और सीता जी का एक दूसरे को देखने का प्रसंग रामचरित मानस में उल्लिखित है, वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) के अनुसार श्री राम ने सीताजी को विवाह के समय ही देखा था।
  3. वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) के अनुसार राजा जनक ने सीता स्वयंवर नहीं करवाया था, अपितु जनकपुरी में शिव धनुष का प्रदर्शन सार्वजनिक था। जब महर्षि विश्वामित्र के साथ श्री राम और लक्ष्मण जनकपुर आये, तो राजा जनक ने उन्हें शिव धनुष दिखाया और श्री राम ने विश्वामित्र की आज्ञा से धनुष उठा लिया एवं प्रत्यंचा चढ़ाते ही उसे तोड़ दिया; तब राजा जनक ने देवी सीता का विवाह श्री राम से कर दिया था। वहीं रामचरित मानस के अनुसार राजा जनक ने सीता स्वयंवर का आयोजन किया, जब सभी राजा धनुष को उठाने में विफल रहे; तब श्री राम ने उस धनुष को सहज ही उठा कर तोड़ दिया था एवं उसके बाद उनका विवाह संपन्न हुआ था।
  4. रामचरित मानस में लक्ष्मणजी को अत्यंत क्रोधी स्वभाव का बताया गया है। वे बात – बात पर क्रोधित हो जाते हैं और स्वयंवर में जनक से और परशुराम से उलझ जाते हैं। वहीं वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) में उन्हें धीर – गंभीर और विवेकी बताया गया है। मूल रामायण में लक्ष्मण केवल तीन बार पर क्रोधित होते हैं, पहला जब उन्हें श्री राम के वनवास का समाचार मिलता है, दूसरा जब चित्रकूट में भरत श्री राम से मिलने आते हैं और तीसरा जब वे सुग्रीव को उसकी प्रतिज्ञा याद दिलाने किष्किंधा पहुँचते हैं।
  5. वाल्मीकि रामायण (valmiki ramayana in hindi) और रामचरित मानस में मूल अंतर यह है कि वाल्मीकि रामायण कर्तव्यों पर आधारित की गयी है, वहीं रामचरित मानस में प्रत्येक प्रसंग को भावनात्मक रूप से दिखाया गया है।

 

भारत में और भी कई प्रसिद्ध रामकथाएं प्रचलित हैं, लेकिन भगवान राम के जीवन चरित्र को एक आदर्श रूप में दिखाने का कार्य महर्षि वाल्मीकि ने ही अपनी रामायण के द्वारा किया है। अन्य सभी रामकथाओं का आधार भी वाल्मीकि रामायण ही है, यही कारण है कि वाल्मीकि रामायण आज भी घर घर में पूजी जाती है।

 

Frequently Asked Questions

Question 1: वाल्मीकि रामायण में कितने कांड है? (valmiki ramayana in hindi)

वाल्मीकि रामायण में 6 कांड है जो इस प्रकार है : बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किन्धा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड। उत्तर कांड को वाल्मीकि रामायण का भाग नहीं माना जाता है, यदि इसे मूल रामायण का भाग मान लिया जाए, तो वाल्मीकि रामायण में 7 कांड होंगे।

Question 2: वाल्मीकि रामायण में कुल कितने श्लोक हैं ?

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में कुल 24 हजार श्लोक हैं।

 

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