जान ले भगवत गीता के
ये श्लोक 

पावन 

5 भगवत गीता श्लोक 

पावन 

1.पहला श्लोक 

पावन 

नैनं छिद्रन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत ॥
हिंदी अनुवाद: आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। 

2.दूसरा श्लोक 

पावन 

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
कर्म को फल के लिए मत करो और न ही काम करने में तुम्हारी आसक्ति हो।

3.तीसरा श्लोक 

पावन 

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है।


4.चौथा श्लोक 

पावन 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
 हे भारत, जब-जब धर्म का लोप होता है और अधर्म में वृद्धि होती है, तब-तब मैं  अवतार लेता हूं।

5.पांचवा श्लोक 

पावन 

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्रात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मन:॥
 यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है ।

पावन 

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