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विश्व का सबसे पुराना धर्म और उनकी 6 विशेषताएँ

धर्म क्या है? सबसे पुराना धर्म कौन सा है (sabse purana dharm kaun sa hai)? यह वैश्विक स्तर से लेकर सुदूर गाँव के हर नुक्कड़ तक, सबसे अधिक चर्चित प्रश्नों में से एक है। और इस प्रश्न पर सबका अलग अलग मत है। कोई कहता है सनातन धर्म पुराना है और कोई कहता है इस्लाम धर्म। किसी के लिए धर्म ईश्वर की आराधना करना है और किसी के लिए उनका कर्म ही धर्म है। किसी के लिए सत्य ही धर्म है और किसी के लिए समाज कल्याण धर्म है। आज इस पोस्ट में धर्म से जुड़ी कई बातों के बारे में विस्तार में जानेंगे, इसलिए इस पोस्ट के अंत तक जरुर बने रहें।

 

धर्म क्या है? What is religion?

धर्म, उसकी परिभाषा, लाभ और लक्ष्यों के बारे में बहुत सारी भ्रांतियाँ हैं और धर्म को लेकर सबकी अपनी अपनी परिभाषा है। धर्म का अर्थ है ईमान, धर्म का अर्थ है सत्य, धर्म का अर्थ है प्रेम और धर्म का अर्थ है बंधुत्व। मंदिर या मस्जिद में जाना धर्म नही। धर्म की नींव प्रेम, मैत्री, करुना और अहिंसा है। धर्म लोगों के बीच की दीवार को हटाता है, न की बनाता है।

धर्म का असली अर्थ है हमारे करम, हमारे कर्तव्य। यदि धरती पर हर मनुष्य अपना अपना धर्म यानी अपना अपना कर्तव्य निभाए तो पूरी धरती और हमारा परिवार खुशहाल हो जाएगा। आज की विडम्बना यही है कि व्यक्ति अपने कर्म पर न ध्यान देकर दूसरों की सफलता और दूसरों के कर्मो पर नजर गडाए बैठा रहता है। यदि वो अपना कर्म करता रहे तो सफलता जरुर पाएगा। यदि सभी व्यक्ति अपने अपने धर्म का पालन नही करेंगे तो इस दुनिया का और इस समाज का अस्तित्व ही धूमिल हो जाएगा।

सबका अपना अपना धर्म है ब्राह्मण और गुरु का धर्म है लोगों के बीच फैली अज्ञानता को हटाना। बेटे का धर्म है अपने माता पिता की सेवा करना, माता पिता का धर्म है अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देना, वही किसी देश की जनता का धर्म है देश के विकास में अपना योगदान देना।

सोचिये की धर्म का सच में मतलब क्या है (what is religion meaning)? धर्म जात पात और हिंसा नहीं सिखाता, असल में यह यह स्वयं के लिए प्रेम, प्रकृति के लिए प्रेम, समुदाय के लिए प्रेम और मन और आत्मा की शुद्धि सिखाता है।

 

Sabse Purana Dharm Kaun Sa Hai? सबसे पुराना धर्म कौन सा है?

Duniya ka sabse purana dharm हिन्दू धर्म  है। विकिपीडिया, मानवविज्ञानी और इतिहासकारों के अनुसार, हिंदू धर्म (जिसे सनातन धर्म भी कहा जाता है) 15 वीं – 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के युग का है। इनमें से पहला और सबसे महत्वपूर्ण उल्लेख वेदों में है – भारतीय उपमहाद्वीप पर 15 वीं और 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के बीच संकलित चार ग्रंथ, और विश्वास के सबसे पुराने ग्रंथ – जो बिना किसी संदेह के हिंदू धर्म को अस्तित्व में सबसे पुराना धर्म (sabse purana dharm / oldest dharma in world) बनाते हैं।

Sabse Purana Dharm - Hindu Dharm

यह तब से एक विविध और लचीली परंपरा में विकसित हुआ है, जो ‘संभावित विद्वतापूर्ण विकास को अवशोषित करने’ की क्षमता के लिए है। कई अनुयायी हिंदू धर्म को सनातन धर्म के रूप में संदर्भित करते हैं, जो इस विचार को संदर्भित करता है कि इसकी उत्पत्ति मानव इतिहास से परे है, और कुछ शास्त्रों में यह भी लिखा है कि सनातन धर्म की शुरुआत सृष्टि के साथ हुई थी।

परन्तु इस विषय पर विश्व में प्रचलित कई विवाद भी है। कोई कहता है हिन्दू धर्म सबसे पुराना धर्म है तो कुछ कहते हैं इस्लाम धर्म sabse purana dharm है और कोई कहता है ईसाई sabse purana dharm है। परन्तु हमें समझना चाहिए की यह कोई प्रतियोगिता नहीं है और सभी धर्म अमूल्य हैं। सभी धर्म प्रेम का सबक सिखाते हैं।

सनातन धर्म क्या है? What is Sanatan Dharma?

ऐसा माना जाता है कि सनातन का अर्थ है जो न नया है और न पुराना, न जिसका आदि है और न ही अंत। ये सभी गुण सिर्फ और सिर्फ ईश्वर में है, इसलिए ईश्वर ही सनातन है। यह हिंदू धर्म के “शाश्वत” सत्य और शिक्षाओं को संदर्भित करता है। इसका अनुवाद “जीने का प्राकृतिक और शाश्वत तरीका” के रूप में भी किया जा सकता है।

हिन्दू धर्म अथवा सनातन धर्म, जो की सबसे पुराना धर्म (sabse purana dharm) है, दर्शन और साझा अवधारणाओं, अनुष्ठानों, ब्रह्माण्ड संबंधी प्रणालियों, तीर्थ स्थलों और साझा पाठ स्रोतों द्वारा चिह्नित विचारों की एक विविध प्रणाली है जो धर्मशास्त्र, तत्वमीमांसा, पौराणिक कथाओं, वैदिक यज्ञ, योग, अगामी अनुष्ठानों और मंदिर निर्माण पर चर्चा करते हैं।

सनातन धर्म की 6 विशेषताएँ 

  1. सनातन धर्म में ईश्वर की आराधना और उपासना की एक नही बल्कि 100 से भी ज्यादा पद्धतियां हैं। भगवत गीता में भी श्री कृष्ण ने १6 तरह के यज्ञो का ज़िक्र किया है। बाकि सभी धर्मो में एक या दो पद्धतियां होती है लेकिन सनातन धर्म में ढेरो पद्धतियां हैं।
  2. सनातन धर्म में इतनी तरह की पूजा पद्दतियो का विकास मनुष्य की अलग अलग प्रकृति के लिए हुआ। मनुष्य की चार प्रकार की प्रकृति होती है। एक प्रकार के मनुष्य भावुक होते हैं। वो हर चीज और ईश्वर के प्रति बहुत भावुक होते हैं। मनुष्य एक प्रकार की प्रकृति है सक्रीय। यानि ये वो मनुष्य है जो हमेशा ही सक्रीय रहते हैं। वो कभी भी खली बैठे नही दिखते। अगली प्रकृति है तार्किक प्रकृति के। ये हर बात पर विश्वास तर्क के आधार पर ही करते है चाहे वो ईश्वर की आराधना ही क्यों न हो। चौथी प्रकृति के लोग है गुड  वाले। यानी वो लोग जो हर बात को गहराई से समझकर उसका पालन करते है। जब ईश्वर ने अलग अलग प्रकृति के लोग बनाए हैं तो ईश्वर को पाने का कोई एक तरीका कैसे हो सकता है। सभी प्रकृति के लोग अपनी अपनी प्रकृति के हिसाब से ईश्वर की आराधना करते है। इंसानी प्रकृति के अलग अलग होने की वजह से ही सनातन धर्म में अलग अलग पूजा उपासना नियम अस्तित्व में आए।
  3. सनातन धर्म की एक खास विशेषता है उदारता और सहिष्णुता। इस धर्म के अनुसार सभी धर्म अपने अपने तरीके से एक ही ही ईश्वर को पाने का प्रयास कर रहे हैं।
  4. सनातन धर्म अपने आप में एक सम्पूर्ण ग्रन्थ हैं जो व्यक्ति को जीवन जीने का सही तरीका समझाता है।
  5. सनातन धर्म में कई देवी देवताओं की उपासना की जाती है लेकिन ये भी सत्य है ये सभी देवी देवता एक ही ईश्वर के अलग अलग रूप हैं।
  6. सनातन धर्म को माने वाले सिर्फ भारत में ही नही है बल्कि नेपाल और मॉरिशस में हैं। इंडोनेशिया में भी इस धर्म को माने वाले कई लोग हैं।

 

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List of Oldest Religions in the World (सबसे पुराने धर्मों की सूची)

दुनिया भर में कई धर्म है जिसे लोग अपनाकर ईश्वर को पाने के लिए उपासना करते हैं। अगर आप विश्व के अन्य सबसे पुराने धर्मों (sabse purana dharm) के बारे में जानना चाहते है तो यह है इसकी सूचि:

हिन्दू धर्म – हिन्दू धर्म की उत्पत्ति हुई 15 वीं और 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व के समय। हिन्दू धर्म को पहले सनातन धर्म के नाम से जाना जाता था। हिन्दू धर्म में कई वेद, शास्त्र और पूरण लिखे गए जो लोगों को जीने का सही तरीका सिखाते हैं।

यहूदी धर्म – यहूदी धर्म sabse purana dharm में से एक है और ये धर्म 4000 साल पुराना है। आज इस धर्म को Israel में अपनाया जाता है। इस धर्म में मूर्ति पूजा नही होती। ये धर्म एकेश्वर को मानता है। ऐसा माना जाता है कि यहूदी धर्म से ही इस्लाम धर्म और ईसाई धर्म की उत्पत्ति हुई थी।

ईसाई धर्म – इतिहास के अनुसार ईसाई धर्म 2000 साल पहले अस्तित्व में आया था। ईसा मसीह इस धर्म के संस्थापक हैं।

इस्लाम धर्म – इस धर्म की शुरुआत 1400 ईसा पूर्व हुई थी। इसकी स्थापना हज मुहम्मद अलै ने की थी और इसे लोगों तक हजरत मुहम्मद सल्ल ने पहुचाया था।

पेगन धर्म – पेगन धर्म के अनुयायी अरब, रोम और कई दूसरे इलाको में हैं। इस धर्म के कई अनुयायी यूरोप में भी हैं।

पारसी धर्म – पारसी धर्म की शुरुआत पैगम्बर जरथुस्त्र ने की दी। पारसी धर्म के लोगों एकेश्वर को मानते हैं। वो अहुरा मज़्दा की पूजा करते हैं। इतिहास के अनुसार पारसी धर्म की शुरुआत 1700 से 1500 ईस्वी पूर्व हुई थी।

वुडू धर्म – ये धर्म आदिवासियों, आदिम जनजातियो द्वारा माना जाता है। इस धर्म के लोग इसे अलग अलग जगह पर अलग अलग नाम से मानते हैं। इतिहास के अनुसार ये धर्म जादू टोन, झाड फुक या काबिले की परंपरा को मानते हैं।

जैन धर्म – जैन धर्म को श्रमाणों का धर्म के नाम से भी जाना जाता है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकर हैं। जैन धर्म के पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव हैं और आखिर तीर्थंकर महावीर स्वामी जी हैं। जैन धर्म के प्राचीन होने का सबूत कई पौराणिक साहित्यो में मिलता है। इस धर्म का मुख सिद्धांत हैं अहिंसा। इस सिद्धांत का इस धर्म में सख्ती से पालन होता है। इस धर्म में खाने पीने का और आचार विचार के विशेष नियम होते हैं।

बौध धर्म – इस धर्म के अनुयाई जापान, चीन, थाईलैंड, कोरिया, श्रीलंका, कंबोडिया, भूटान, नेपाल और भारत में रहते हैं। ये धर्म भी अहिना को मानता है।

शिन्तो धर्म – इस धर्म के लोग जापान में रहते हैं।

सिख धर्म – सिख धर्म के दस गुरु हैं जिसमें प्रथम हैं श्री गुरुनानक देव जी। इस धर्म की शुरुआत 600 वर्ष पूर्व हुई। श्री गुरु गोविन्द सिंह जी ने सिख धर्म को व्यवस्थित किया।

 

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धर्म के उद्देश्य (Purpose of Religion)

कभी आपने सोचा है की धर्म की अवधारणा आई क्यों? क्या है धर्म का उद्देश्य? आइये जानते है:

  • धूति – अपनी इन्द्रियों और जिव्हा पर नियंत्रण रखना
  • क्षमा – व्यक्ति में उदारता और क्षमा भावना होनी चाहिए
  • संयम – मानसिक और शारीरिक वासनाओ को रोकना और स्वयं को शुद्ध बनाना
  • अस्तेय – चोरी न करना
  • शुचिता – मन और आत्मा की पवित्रता
  • इन्द्रिय निग्रह – लक्ष्य को पाना है तो इन्द्रियों पर नियंत्रण जरुरी है
  • धी – धर्म का उद्देश्य है मानव बुद्धि का विकास
  • विद्या – धर्म में विद्या को बहुत महत्वपूर्ण मना गया है। विद्या प्राप्त करके ही व्यक्ति लोभ, मोह और क्रोध को नियंत्रित कर पात़ा है
  • सत्य- धर्म सच पर चलने का मार्ग दिखाता है
  • अक्रोध- गीता के अनुसार कामनाओं पूरी न होने पर क्रोध आता है जिससे व्यक्ति लक्ष्य से हटकर असामान्य और गलत व्यव्हार करने लगता है

 

धर्म का महत्व (Importance of Religion)

  • धर्म मानव जीवन को सवारता है और धर्म ही समाज को एकसूत्र में बांधता है
  • धर्म ही समाज को स्थायित्व देता है और इसी से ही धरती पर मानवता जीवित है
  • धर्म में पाप और पुन्य क्या है ये विस्तृत रूप से बताया गया है और ये ज्ञान व्यक्ति और समाज को गलत राह में जाने से रोकता है। सभी धर्मो में मानवता को सर्वोपरी माना गया है और सभी धर्म प्रेम का सन्देश देते हैं। यदि सभी व्यक्ति धर्म की असली परिभाषा को अपना ले तो कभी भी लोगों के बीच क्लेश और द्वेष नही आएगा।
  • धर्म व्यक्ति का और समाज का विकास करता है। धर्म का अनुसरण कर व्यक्ति अपने आप में शक्ति महसूस करता है। धर्म उसे व्यर्थ की चिंता से दूर रहने की सलाह देता है और अपने कर्मो को करने का सन्देश देता है। धर्म की पवित्र भावनाएं व्यक्ति को सही राह दिखाती हैं।
  • धर्म व्यक्ति में सुरक्षा की भावना जागृत करती है। व्यक्ति अपने धर्म का पालन कर ईश्वर को अपने आप में और अपने समीप पाता है। सभी ये मानते हैं कि जो भी होगा उसमें ईश्वर की मर्जी छिपी है। ईश्वर सर्वेसर्वा और अलोकिक शक्ति हैं।
  • धर्म लोगों में समाज कल्याण की भावना पैदा करता है। सभी धर्म लोगों में प्रेम, सहयोग और परोपकार के गुण विकसित करते हैं।

आशा करते है की आपको इस पोस्ट में धर्म सम्बन्धी सभी ज्ञान प्राप्त हुआ होगा और यह भी पता चला होगा की दुनिया का सबसे पुराना धर्म कौन सा है (sabse purana dharm kaun sa hai)? ऐसी और जानकारी के लिए पावन ब्लॉग को प्रत्येक दिन पढ़ें।

 

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