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प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर का इतिहास, विशेषता और रहस्य

भारत में कई ऐसे पर्यटन स्थल है जिसे विश्व धरोहर और अद्भुत कला की निशानी माना जाता है, जैसे ताजमहल। ऐसे ही पर्यटन स्थलों में से एक है खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) जो अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए दुनिया भर में इतना लोकप्रिय है कि हर पर्यटन प्रेमी की लिस्ट में इसका नाम अवश्य होता है। पहले छतरपुर जिला खजूर के जंगलों के लिए जाना था, लेकिन जब से यहाँ पर खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) बना, यह जिला इस मंदिर के लिए जाना जाने लगा।

UNESCO ने भी खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) को अपनी लिस्ट में जगह दी है। मध्यकालीन समय में बना ये प्रसिद्ध मंदिर महिलाओं की जीवन शैली को मूर्तियों के जरिए शानदार रूप में प्रस्तुत करता है। दूर से अगर इन मंदिरों को देखा जाए तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये मंदिर चन्दन की लकड़ी से बने हुए हैं।

कुछ पुरातत्त्वज्ञ (archeologists) के अनुसार इन मंदिरों में आज भी जो चमक बनी हुई है वो इन मूर्तियों को रंगने में इस्तेमाल किए गया चमड़ा है। ये मंदिर कलाकृतियों के साथ साथ विशाल छतो के लिए जाना जाता है। खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) कुंडलीदार रचना के लिए भी जाने जाते हैं जो काफी जटिल प्रतीत होते हैं । पहले इन मंदिरों में सिर्फ साधु संत ही आते थे, फिर ये विलुप्त सा हो गया और फिर से 20 वीं शताब्दी में चर्चा में आया। तब से लेकर आज तक भारतीय इतिहास की इस अद्भुत कला को संरक्षित किया जा रहा है।

खजुराहो मंदिर का इतिहास (History of Khajuraho Temple in hindi)

खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) मध्यप्रदेश राज्य के छतरपुर शहर में स्थित है। खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) का निर्माण चंदेल वंश के दौरान किया गया था, जो 950 और 1050 के बीच अपने चरम पर पहुंच गया था। 

History of Khajuraho Temple in Hindi

अबू रेहान अल-बिरूनी (1022 ईस्वी) और इब्न बतूता (1335 ईस्वी) अपनी पुस्तकों में खजुराहो के बारे में बात करने वाले पहले व्यक्ति थे। इन दस्तावेजों के अनुसार, खजुराहो मंदिर 20 square kilometer में फैले हुए थे और इसके परिसर में कुल 85 मंदिरों की मेजबानी की गई थी। समय के साथ, मंदिरों की संख्या कम होती गई और अभी केवल 20 मंदिर ही देखे जा सकते हैं। चंदेल साम्राज्य ने दसवीं से चौदहवीं शताब्दी तक मध्य भारत पर शासन किया। उनकी कला और स्थापत्य कला में गहरी रुचि थी, जो इस मंदिर के निर्माण का मुख्य कारण था।

खजुराहो मंदिर से जुड़ी कई कहानियां या सिद्धांत हैं। एक सिद्धांत शिव-शक्ति संप्रदाय के विस्तार के रूप में इन मंदिरों के निर्माण की बात करता है। एक अन्य सिद्धांत कहता है कि यह मंदिर देवदासियों का प्रतिनिधित्व करता है और कुछ सबसे खूबसूरत महिलाओं को यहां देवदासी बनने के लिए मगध, मालवा और राजपुताना जैसे शहरों से लाया गया था।

एक अन्य सिद्धांत कहता है कि मंदिर में उकेरी गई मूर्तियाँ एक सामान्य मनुष्य के जीवन-चक्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। चूंकि इसके निर्माण का कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है, इसलिए इन सिद्धांतों को मान्य करना मुश्किल है। फिर भी, हमने खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) के रूप में एक वास्तुशिल्प चमत्कार प्राप्त किया है और इसे संरक्षित करना हमारा कर्तव्य है।

 

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खजुराहो क्यों प्रसिद्ध है? खजुराहो मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ

खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) अपनी अकल्पनीय और अद्भुत शिल्पकला के लिए जाना जाता है। यहाँ साल भर सैलानियों का ताँता लगा रहता है। ये भारत के प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में से के है। यहाँ के मंदिरों में एक से बढकर एक कामोत्तेजक मूर्तियाँ हैं। यहाँ पर कई जैन और हिन्दू धर्म के मंदिर हैं। ये अद्भुत कला का साक्षी है और इसे विश्व धरोहर के रूप में भी घोषित कर दिया गया है। खजुराहो का मंदिर इतना आकर्षक और भव्य है कि जो भी यहाँ आता है वो इसे बनाने वाले शिल्पकारो की कला पर मन्त्र मुग्ध हो जाता है।

Khajuraho Ka Mandir - features

यहाँ हर दिशा में कई मंदिर बनाए गए हैं। पश्चिम दिशा में चौसठ योगिनी मंदिर, कंदरिया महादेव मंदिर,  देवी जगदंबा मंदिर, चित्रगुप्त या भरतजी का मंदिर, विश्वनाथ मंदिर,  लक्ष्मण मंदिर, लालगंज महादेव मंदिर, महादेव मंदिर, नंदी मंदिर, वराह मंदिर और पार्वती मंदिर आदि है। पूर्व दिशा में  घंटाई मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, घंटाई मंदिर, भगवान ब्रह्मा का मंदिर, जावरी मंदिर, वामन मदिर,  ब्रह्मा मंदिर आदि हैं। दक्षिण दिशा में  जटकारी या चतुर्भुज मंदिर, दुलादेव मंदिर हैं।

खजुराहो के मंदिर अपनी अनूठी और अद्भुत कला के लिए सभी सैलानियों में प्रसिद्ध है। इस मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है। यहाँ मंदिरों कई ऐसी स्थान बनाए गए हैं जो इसे बाकि मंदिरों से अलग बनाते हैं। यहाँ हर मंदिर ने नीचे एक गर्भ गृह बनाया गया है। इसके अलावा यहाँ एक आन्तरिक कक्ष, अतिरिक्त सभाग्रह, एक अनुप्रस्थ भाग, मंडप और चल मार्ग बनाया गया है। इन मंदिर में बड़ी बड़ी खिड़कियाँ भी हैं। इस मंदिर में बनाई गयी नक्काशी का सम्बन्ध पौराणिक कथाओ और हिन्दू देवताओं से है।

ऐसा कहा जाता है कि खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) पन्ना खदानों से लाए गाए रेतीले पत्थरों से बनाए गए हैं। ये खदान केन नदी के पूर्व दिशा में है। इसे बनाने के लिए लोहे का भी प्रयोग किया गया है।

इस मंदिर में भार 646 और अन्दर 246 कलाकृतियाँ हैं।असाधारण कला में पारंगत कारीगरों ने इस अद्भुत मूर्तियों को बनाया जिसके आज सभी लोग कायल हैं। इस मंदिर में कमरे आपस में जुड़े हुए हैं और इनका निर्माण इस तरह से किया गया है कि जब भी सूर्य देव उदय हो उनकी रौशनी सीधे मूर्ति पर पडे।

सभी हिन्दू मंदिरों की तरह इन मंदिरों का मुख भी सूर्योदय की तरफ रखा गया है। यहाँ की गयी नक्काशी काम, धर्म, मोक्ष और अर्थ को प्रस्तुत करती है। इन मूर्तियों से चंदेलो का नृत्य और संगीत की तरफ रुझान साफ़ झलकता है। यहाँ बनी मूर्तियाँ अलग अलग प्रकार से बनाई गयी है। कुछ मूर्तियाँ सांप्रदायिक छवियो को दिखाती है, कुछ मूर्तियाँ अप्सराओं की हैं, कुछ अवराणा देवता, परिवार की हैं, कुछ संगीतकारों, नर्तकियो, घरेलु दृश्यों की हैं और कुछ जानवरों की हैं।

 

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खजुराहो मंदिर का रहस्य (Secrets of Khajuraho Temple)

खजुराहो के मंदिर से जुडी एक कथा मशहूर है। ये मंदिर विश्वभर में अपनी मूर्तियों के लिए जाना जाता है। इन मूर्तियों के पीछे एक पौराणिक कथा है। इस कथा के अनुसार काशी शहर में एक ब्राह्मण रहता था। उसकी बेटी का नाम था हेमावती। हेमावती सौन्दर्य में सबसे आगे थी। बेहद खुबसूरत हेमावती एक बार नदी में नहाने गयी। जब वो नहा रही तब चाँद यानी चन्द्र देव ने उनको देखा।

Khajuraho Ka Mandir Rahasya

चन्द्र देव हेमावती के सुन्दरता पर इतने मन्त्रमुग्ध हो गए उन्होंने मन ही मन उसे अपना बनाने का इरादा कर लिया। एक बार वो हेमावती के घर वेश बदलकर गए और उसको अगवा कर लिया।  जब हेमावती चन्द्र देव के साथ रहने लेगी तब दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया।

दोनों को एक पुत्र हुआ जिसका नाम चन्द्रवर्मन रखा गया। चंद्र्वर्मन एक बहादुर शासक था। उन्होंने ही चंदल वशं की शुरुवात की। हेमवती ने अपने पुत्र का लालन पालन जगल में किया लेकिन वो हमेशा से चाहती थी कि उनका बेटा बहुत सफल राजा बने। चंद्र्वर्मन ने भी अपनी माँ की इस इच्छा को पूरा किया और वो एक तेजस्वी और वीर राजा बना। चन्द्रवर्मन ने ही छतरपुर में खजुराहो के मंदिर बनवाए। उन्होंने ये मंदिर इतने भव्य और शानदार बनाए कि इतने सालो बाद भी आज भी उनकी कला सलामत है और विश्वभर में मशहूर है।

खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) इतने सालो से अपनी कलाकृतियों और अद्भुत नक्काशी के लिए जाना जाता है जिसे सरकार का पर्यटन विभाग निरंतर संरक्षित करने में लगा हुआ है। हमे भी अपने ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद करनी चाहिए। पर्यटकों को वहां जाना चाहिए लेकिन दीवारों पर लिखकर इसे ख़राब नही करना चाहिए। ये हमारे स्वर्णिम इतिहास और कुशल कला का नमूना है जिससे भारत को विश्व भर में प्रसिद्धी मिली।

 

Frequently Asked Questions

Question 1: खजुराहो का मंदिर कहां है?

खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) मध्यप्रदेश राज्य के छतरपुर शहर में है। खजुराहो पहुंचने का सबसे आसान तरीका हवाई मार्ग से है, हवाई अड्डा शहर से केवल 2 मिनट की ड्राइव दूर है। नहीं तो आप छतरपुर से बस ले सकते हैं। खजुराहो शहर छतरपुर जिले से 44 किमी, ग्वालियर से 281 किमी, भोपाल से 375 किमी, इंदौर से 565 किमी, रांची से 355 किमी दूर है।

Question 2: Khajuraho Mandir ka nirman kisne karwaya?

खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) का निर्माण चंदेल वंश के दौरान किया गया था, जो 950 और 1050 के बीच अपने चरम पर पहुंच गया था। केवल 20 मंदिर ही बचे हैं; वे तीन अलग-अलग समूहों में आते हैं और दो अलग-अलग धर्मों से संबंधित हैं – हिंदू धर्म और जैन धर्म।

Question 3: खजुराहो मंदिर कितने वर्ष पुराना है?

खजुराहो का मंदिर (Khajuraho ka mandir) निर्माण 900 ईस्वी से लेकर 1130 ईस्वी के बीच हुआ। इन मंदिरों का समुह 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है।  12 वी शताब्दी तक यह मंदिर जैसा बनाया गया था उतना ही आकर्षक बना रहा लेकिन 13 शताब्दी में मुगलों ने दिल्ली पर कब्ज़ा करने के बाद चंदेल साम्राज्य को भी हथिया लिया और उन्होंने मंदिरों में कुछ बदलाव करने की कोशिश की।

इससे इन मंदिरों की खूबसूरती कम होने लगी। 13 से 18 वी सदी तक खजुराहो पर मुगलों का कब्ज़ा था। उन्होंने कई शाही बनावट और कलाकृति के लिए मशहूर मंदिरों को नुक्सान पहुंचाया।1495 ईस्वी में सिकंदर लोदी ने खजुराहो पर हमला करके कई मंदिर नष्ट कर दिए थे। कुछ मंदिर प्राकर्तिक आपदाओं का शिकार हो गए थे।

 

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