Paavan Logo
real life inspirational stories in hindi
Share on whatsapp
Share on facebook
Share on telegram
Share on linkedin
Share on twitter

टॉप 5 इंडियन मोटिवेशनल स्टोरीस – जीवन में कभी हार न मानें

जीवन में कई पड़ाव ऐसे आते हैं जब हम हताश हो जाते है। हमें लगता है कि अब हम क्या करें? कहीं सब कुछ ख़तम तो नहीं हो गया। ऐसा सोचते हुए हम निराशावादी बनते जाते है। इस निराशा को दूर करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए उत्साह की आवश्यकता होती है।

इस उत्साह को बढ़ाने के लिए “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मोटिवेशनल स्टोरी को सुनकर और उनके द्वारा जीवन में किये गए संघर्षों को जानकर स्वयं में प्रेरणा आने लगती है। इससे हम उत्साहित हो जाते है और अपने कार्यों को एक नए जोश के साथ करने लगते है।  

इस उत्साह को बढ़ाने और नकारात्मकता को खत्म करने के लिए को हम कुछ ऐसे लोगों के जीवन की मोटिवेशनल स्टोरी लाये है जिसे जानकर आप भी उत्साहित हो जायेंगे। जानते है “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)”.

 

Top 5 Real life Inspirational Stories in Hindi

रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi) में आप जानेंगे ऐसे लोगों के बारे में जिन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी और कुछ ऐसा किया कि वह दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए।

1) अभिनव बिंद्रा – व्यक्तिगत शूटिंग में स्वर्ण पदक पाने वाले प्रथम भारतीय

real life inspirational stories in hindi - abhinav bindra

“रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में अभिनव बिंद्रा का नाम भी आता है। अभिनव बिंद्रा का नाम खेल जगत में बहुत मशहूर है। वह अपनी कुशल शूटिंग के लिए जाने जाते है। 28 सितम्बर 1982 में अभिनव बिंद्रा का जन्म उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। एथेंस ओलम्पिक में उन्हें कोई पदक नहीं मिला। जिसके चलते अभिनव को निराशा हुयी और उन्होंने यह तय कर लिया कि वह देश को स्वर्ण पदक दिला कर रहेंगे।अभिनव ने कड़ी मेहनत करना शुरू कर दिया।

कई खेलों के दौरान उन्हें सफलता हासिल नहीं हुयी और उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। जिसके कारण वह डिप्रेशन में भी चले गए। उनके व्यवहार में भी बदलाव आयें परन्तु उन्होंने इन परेशानियों से हार नहीं मानी। ऐसा बताया जाता है, कि पदक पाने की जूनून में उन्होंने सभी लोगों से किनारा कर लिया। वह किसी से बात नहीं करते थे। ज्यादा से ज्यादा समय , अपने शूटिंग के अभ्यास पर लगाते थे। प्रेक्टिस के लिए उन्होंने पर्सनल कोच भी रख लिया।

तपस्या रंग लायी :
उनकी यह कड़ी तपस्या बीजिंग ओलम्पिक 2008 में रंग लायी। जब अभिनव बिंद्रा ने 10 मीटर एयर रायफल स्पर्धा में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया और वह इस जीत के साथ पहले ऐसे भारतीय बने जिन्होंने व्यक्तिगत शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता। “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” के प्रेरणा स्त्रोत बन गए।

 

ऐसा और ज्ञान पाना चाहते हैं? यह भी पढ़ें फिर:

नैतिक मूल्य के ज्ञानवर्धन हेतु पढ़ें पंचतंत्र की कहानियां

भगवान विष्णु के 10 अवतार तथा हर अवतार के पीछे की कहानी और उनका महत्व

 

2) चन्द्रप्रभा अटवाल – अड़सठ की उम्र में हिमालय जीता

real life inspirational stories in hindi - Chandraprabha Atwal

अड़सठ की उम्र में जब लोग रिटायरमेंट लेकर घर पर आराम करते है | उस उम्र में चंद्र प्रभा अटवाल ने हिमालय की छोटी पर तिरंगा फहराकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आप अपने लक्ष्य को किसी भी उम्र में पूरा कर सकते हो।

“रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में चन्द्रप्रभा अटवाल किसी प्रेरणा से कम नहीं है। चंद्रप्रभा अटवाल का जन्म उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में हुआ था। वह पहाड़ों की गोद में पली बढ़ी। उन्हें पहाड़ों से काफी लगाव था इसलिए उन्होंने पहाड़ों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया और कभी विवाह नहीं किया।

तिरंगा लहराकर मिशाल की कायम :
बुलंद हौसले के चलते अड़सठ की उम्र में भी चंद्रप्रभा ने हिमालय की 6133 मीटर ऊंची चोटी श्रीकंठ पर तिरंगा लहराकर एक मिसाल कायम की। चंद्र प्रभा अटवाल 1981 में रेखा शर्मा और हर्षवंती बिष्ट के पीछे नंदा देवी (7,816 मीटर) की चोटी पर पहुंचीं। यह पहली बार था जब महिलाओं ने भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी पर पैर रखा था। चंद्रप्रभा 8 महिला पर्वतारोहियों के दल का नेतृत्व करती थी।

उन्हें 40 साल का पर्वतारोहण का अनुभव था जिसके चलते चन्द्रप्रभा ने कई देशो में पर्वतारोहण भी किया है। जिसमे चीन, नेपाल, जापान आदि के पहाड़ शामिल है। चंद्रप्रभा का माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का भी सपना था परन्तु वह सपना पूर्ण नहीं हो सका। परन्तु अड़सठ की उम्र में हिमालय की छोटी पर तिरंगा फहराकर वह लोगो के लिए “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” की इंस्पायरेशन बन गयी।

 

3) भारत रत्न प्राप्त डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

real life inspirational stories in hindi - A. P. J. Abdul Kalam

“रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा किये गए संघर्षों को जानकर लोग आशचर्यचकित होते है। उनका जीवन कुछ इस तरह बीता। एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में हुआ। उनके पिता का नाम जेनुअलुद्दीन था। एपीजे अब्दुल कलाम एक तमिल मुस्लिम परिवार से थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता के पास एक छोटी नाव थी जिसके जरिये वह नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे पर हिन्दू यात्रियों को पहुंचाने का कार्य करते थे। परन्तु इन पैसों से सिर्फ घर ख़र्च चलता था। उनके पिता अन्य कार्यों को कर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे।

कुछ नया सीखने की चाह :

अब्दुल कलाम जब थोड़े बड़े हुए तो उन्होंने अपने परिवार की अधिक मदद हेतु साईकिल से अख़बार डालने का कार्य शुरू कर दिया। इन पैसों से वह घर का कुछ सहयोग कर देते थे। कलाम पढ़ाई में बहुत ही बुद्धिमान थे इसलिए कार्य करने के बाद जब भी समय मिलता तो वह पढ़ाई भी किया करते। वह हमेशा कुछ नया सीखते रहते।

उन्होंने कभी भी अपने परिवार की परेशानियों को अपनी पढ़ाई की बीच नहीं आने दिया। उनकी पढ़ाई के प्रति निष्ठा देखकर उनके परिवार वालों ने भी कलाम जी का साथ दिया। 1954 में कलाम ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली। आगे की पढ़ाई के लिए कलाम जी 1955 में मद्रास आए। जहाँ मद्रास इंस्टीटूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा ली।

वहां उन्होंने पूरी लगन के साथ पढ़ाई की और DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में उभर कर सामने आये। इसके बाद भी वह रुके नहीं। उन्होंने फिर इसरो ज्वाइन किया। इसरो में उन्होंने कई मिसाइल और रक्षा उपकरण बनाये तो भारत देश के लिए किसी वरदान से कम नहीं थे। 2002 में कलाम जी को भारत का राष्ट्रपति चुना गया। कलाम जी यहाँ पर भी नहीं रुके और भारत को रक्षा के क्षेत्र में मार्गदर्शन करते रहे। इस तरह  उन्होंने “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में लोगों के दिल में अपनी जगह बना ली।

 

4) महान गणितज्ञ रामानुजन

real life inspirational stories in hindi - Srinivasa Ramanujan

भारत देश में कई ऐसे लोगों ने जन्म लिया है जिन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा से सभी को अचंभित किया है। उनके ज्ञान कौशल से भारत को गर्व की अनुभूति हुयी है। ऐसे ही अद्भुत प्रतिभा के धनी थे महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन। उनके गणितीय ज्ञान से उन्होंने देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी ख्याति प्राप्त की। “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” इन्होंने भी अपनी एक अलग ही जगह बनायीं है।

रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 तमिलनाडु प्रांत के इरोद नामक गाँव में हुआ था। वह एक निर्धन ब्राह्मण परिवार से थे। श्रीनिवास अयंगर उनके पिता का नाम था। रामानुजन बहुत ही बुद्धिमान और मेधावी बालक थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कुंभकोकम में हुयी थी। 1897 में प्राइमरी परीक्षा में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त कर सम्पूर्ण तंजोर को गौरवान्वित कर दिया था। उसके उपरान्त तंजौर के टाउन हाईस्कूल में उन्हें दाखिला मिल गया। यहाँ से ही उन्हें गणित के प्रति लगाव होने लगा। उन्होंने अपनी मेट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्रीर्ण की। प्रथम श्रेणी आने पर उन्हें छात्रवृति भी मिलने लगी थी।

 

Download Paavan App

 

गणित के प्रति रुझान :
रामानुजन का मन तो केवल गणित के प्रश्नों में लगा रहता था जिसकारण वह अन्य विषयों को बहुत ही कम समय देते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि वह एफ ए की परीक्षा के दौरान गणित विषय में पूर्ण अंक ला पाए परन्तु आयु विषयों में उन्हें पासिंग मार्क भी नहीं मिल सके। और वह परीक्षा में फेल हो गए। फेल होने से उनकी छात्रवृति बंद हो गयी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इस कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ने पड़ी।

परन्तु गणित के प्रति उनका लगाव कम नहीं हुआ। वह कठिन से कठिन गणित के प्रश्नों को हल करने में जुट जाते थे। उनकी इस विलक्षण प्रतिभा को देखकर स्थानीय विद्वानों ने उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कैंब्रिज विश्वविद्यालय जाने के लिए प्रेरित किया। रामानुजन जी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रो. हार्डी को पत्र लिखा और साथ ही कुछ जटिल प्रश्नों को हल कर पत्र के साथ भेजा। जानेमाने प्रो. हार्डी ने जब उन प्रश्नों के हल देखे तो वह रामानुजन से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें इंग्लैंड बुला लिया।

उनके मार्ग दर्शन से रामानुजन के काफी कुछ सीखा और अपनी गणित की प्रतिभा को निखारा। कुछ ही समय में वह गणित के शोध के लिए जाने जाने लगे। उनकी प्रतिभा का डंका चारों और बजने लगा। उनकी गणना सर्वश्रेष्ठ गणितज्ञों में की जाने लगी थी। उन्हें इंग्लैंड की विख्यात विद्वत ‘ रायल सभा सोसायटी ‘ के सम्मान से नवाज़ा गया। इस तरह उन्होंने अपनी मेहनत और अपने कार्य के प्रति रूचि रखकर महान ख्याति प्राप्त की। “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में कई लोग रामानुजन से इंस्पायर हुए है और अपने जीवन को सफल बनाया है।

 

5) धीरूभाई अम्बानी – 300 से 75000 करोड़ तक का सफर

real life inspirational stories in hindi - Dhirubhai Ambani

“रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में धीरू भाई अम्बानी को हर व्यक्ति जानता है। वह दुनियाँ के अमीर व्यक्तियों में गिने जाते है। लेकिन आपको पता है कि धीरू भाई अम्बानी पहले से अमीर नहीं थे। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कठिन परिश्रम और परेशानियों का सामना किया है। धीरू भाई अम्बानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 में गुजरात के जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गाँव में हुआ था। उनके पिता शिक्षक थे। धीरू भाई अम्बानी 4 भाई-बहन थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इस कारण धीरूभाई अम्बानी को पढ़ाई छोड़कर काम शुरू करना पड़ा।

ऐसा बताया जाता है कि काम की शुरुआत में धीरूभाई अम्बानी फल बेचा करते थे। परन्तु इस काम में उन्हें मन नहीं लगा तो उन्होंने पकौड़े बेचना शुरू किया। पर उनको यह काम भी पसंद नहीं आया। धीरूभाई अंबानी जब 17 साल के हुए तो वह नौकरी करने के लिए अपने भाई रमणीकलाल जो की यमन में था वहां चले गए।

यमन में उन्होंने एक पेट्रोल पम्प पर 300 रुपये प्रति माह पर नौकरी शुरू की। धीरूभाई अम्बानी पेट्रोल पम्प पर बहुत मेहनत और लगन से कार्य करते थे। उनके कार्य से प्रसन्न होकर पेट्रोल पम्प की कंपनी के मालिक ने उन्हें फिलिंग स्टेशन में मैनेजर पद दे दिया।परन्तु वहां भी उन्हें कार्य करना पसंद नहीं आया और वह 1954 में वापस भारत आ गए।

इस तरह शुरू किया व्यवसाय :

वापस लौटने के उपरांत धीरूभाई अंबानी ने पॉलिएस्टर धागे का व्यवसाय अपने चचेरे भाई चंपकलाल दमानी के साथ मिलकर शुरू किया। इसके साथ साथ उन्होंने मसालों के आयात-निर्यात का कार्य भी शुरू कर दिया। परन्तु दोनों भाईयो का संगठन ज्यादा दिन तक नहीं चल सका और दोनों अलग हो गए। फिर धीरूभाई ने गुजरात के अहमदाबाद में 1966 में एक कपड़ा मिल शुरू किया। इसका नाम उन्होंने ‘रिलायंस टैक्सटाइल्स’ रख दिया। यह व्यवसाय उनकी जिंदगी बदलने वाला था।

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और सफलताओं की ओर बढ़ते गए। वह 75000 करोड़ के मालिक बन गए। उनको 1999 में बिजनेस इंडिया की ओर से ‘बिजनेस मैन ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड दिया गया। “रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में बहुत से लोग धीरू भाई अम्बानी से प्रेरित हुए है और उन्हें अपना प्रेरणा स्त्रोत बनाकर आगे बढ़े है।

“रियल लाइफ स्टोरी इन हिंदी (real life inspirational stories in hindi)” में ये कुछ ऐसे लोग है जिन्हे कामयाबी और सोहरत विरासत में नहीं मिली थी बल्कि इन्होने अपनी मेहनत, लगन और जूनून से यह हासिल की थी। इन्होने यह मिसाल भी कायम की यदि कोई व्यक्ति अपना लक्ष्य निश्चित कर ले और उसे दृढ़ता से पूर्ण करे तो वह अपनी मंजिल तक जरूर पहुंच सकता है। मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी फॉर स्टूडेंट्स के लिए भी यह कहानियां शिक्षाप्रद है। आप इन्हे अपने जीवन में शामिल कर सकते है।

 

Frequently Asked Questions
Question 1: मोटिवेशनल स्टोरी (real life inspirational stories in hindi) क्या होती है ?
मोटिवेशनल स्टोरी किसी व्यक्ति विशेष के जीवन में हुए संघर्ष और उसकी कामयाबी की कहानी होती है। जिसे जानकर अन्य लोग प्रोत्साहित होते है और उन्हें अपने जीवन का मार्गदर्शक बना लेते है।

Question 2: जीवन के लिए मोटिवेशनल स्टोरी (real life inspirational stories in hindi) की क्या आवश्यकता होती है ?
मोटिवेशनल स्टोरी नकारात्मकता को दूर कर जीवन में सकारात्मक विचारों को जन्म देती है। यह आपके अंदर एक नए जोश को जगा देती है और जीवन जीने की नयी दिशा प्रदान करती है।

 

ऐसा और ज्ञान पाना चाहते हैं? यह भी पढ़ें फिर:

रामायण महाकाव्य के 7 काण्ड और उनका महत्व

महाभारत में अर्जुन के 12 नाम और हर एक नाम के पीछे का रहस्य

ऐसे और जानकारी पाने के लिए हमारे समाचार पत्रिका को सब्सक्राइब करे

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

Top Posts